सिफरी द्वारा गंगा नदी में मछली छोड़ कर मना विश्व पर्यावरण दिवस

प्रयागराज।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गंगा नदी में विलुप्त हो रहे मत्स्य प्रजातियों के संरक्षण एवम् संवर्धन को ध्यान में रखते हुए, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् – केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सिफरी), प्रयागराज के द्वारा आज दिनांक 5 जून 2026 को पवित्र पावन गंगा और यमुना के संगम तट पर गंगा नदी में 5000 (पाँच हजार) भारतीय प्रमुख कार्प – कतला, रोहू, मृगल मछलियों के अँगुलिका बीज को रैंचिंग कार्यक्रम के तहत छोड़ा गया,इससे नदी की मत्स्य संपदा और मछलियों की संख्या के साथ – साथ मछुआरों की आय में वृद्धि होगी,*खेत बचाओ अभियान* के अन्तर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा० धर्म नाथ झा ने उपस्थित लोगों को खेत बचाओ अभियान के साथ- साथ विश्व पर्यावरण दिवस के बारे में जानकारी दी,संस्थान के केन्द्राध्यक्ष डा० बी० आर० चव्हाण ने समारोह को सम्बोधित करते हुए गंगा नदी में मछली और रैंचिंग के महत्व को बताया,कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ नीलम यादव प्रोफेसर इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज ने गंगा के महत्व के साथ खाद्य पदार्थ के महत्व और संरक्षण के बारे में बताया और गंगा को स्वच्छ रखने एवम जैव विविधता को बचाने के लिए उपस्थित लोगों से आह्वान किया,विशिष्ट अतिथि डॉ अश्विनी कुमार प्रोफेसर इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने पौधों के महत्व और संरक्षण के साथ जन भागीदारी के लिए आह्वान किया,विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ• चौहान ने पर्यावरण के उपयोगिता पर प्रकाश डाला,इस अवसर पर श्री राजेश शर्मा संयोजक नमामि गंगे गंगा विचार मंच राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार, ने मंत्रालय द्वारा गंगा सफाई के लिए किए कार्यो का उल्लेख किया,गंगा टास्क फोर्स के सूबेदार सरजीत नायक जी ने भी सभा में अपनी बातों को रखा और सभी ने गंगा के प्रति जागरूक होने के साथ ही गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प व्यक्त किया,कार्यक्रम में आस – पास गाँव के मत्स्य पालक मत्स्य व्यवसायी स्नानार्थी तथा गंगा तट पर रहने वाले स्थानीय लागों ने भाग लिया,कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक डा० अबसार आलम डॉ विकास कुमार डॉ जितेंद्र कुमार आदि के साथ साथ शोधार्थी डॉ संदीप कुमार मिश्र सुश्री रिंकी कुमारी आदि ने भाग लिया और सभा को सम्बोधित किया।

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