डाडौ में आयोजित भागवत कथा में  कंस वध एवं रुक्मिणी विवाह के  वर्णन पर झूमे भक्त ।

बारा, प्रयागराज। बारा क्षेत्र के डांडो गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास मधुसूदनाचार्य जी ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध और रुक्मिणी विवाह की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने धरती पर पाप का विनाश करने के लिए अवतार लिया, उन्होंने आसुरी शक्तियों का नाश कर धरती को धर्म के मार्ग पर आगे जाने का रास्ता  दिखाया। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि उनमें गूढ़ आध्यात्मिक संदेश छिपा है। श्रीकृष्ण ने कंस जैसे अत्याचारी का वध कर प्रजा को उसके अत्याचारों से निजात दिलाई। अपने भक्तों को प्रेम, करुणा और स्नेह का पाठ पढ़ाया।विदर्भ राजकुमारी रुक्मिणी ने  पत्र लिखकर श्रीकृष्ण को पति के रूप में स्वीकार किया था। जो निश्चल प्रेम का प्रतीक है। श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी के भाई रुक्मी और शिशुपाल को परास्त कर वैशाख शुक्ल द्वादशी को उनका हरण कर द्वारिका में विधि विधान से विवाह किया।
प्रमुख यज्ञमान कमलाकर सिंह एवं श्यामा देवी ने विधि विधान से भागवत भगवान एवं अन्य देवी देवताओं की आरती उतारी। इस मौके पर पुष्पराज सिंह, आयुष सिंह, प्रदीप सिंह, अनीश सिंह, निशा, पूनम, रेनू, आशी, स्नेहा, सुरेश सिंह, प्रमोद सिंह, जगत नारायण सिंह, संतोष तिवारी, पंकज सिंह, जितेंद्र सिंह, अमित सिंह सहित सैकड़ों श्रोतागण मौजूद रहे।

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