जसरा अस्पताल मे सरकारी दवाइयां और जांच किट कूड़े में मिलने से मचा हड़कंप,  वायरल तस्वीरों से खुली पोल

जसरा, प्रयागराज से अमिय शंकर दुबे।  प्रदेश की योगी  आदित्यनाथ सरकार जहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा से सामने आई तस्वीरों ने सरकारी दावों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल परिसर के बाहर कबाड़ और कचरे के ढेर में सरकारी दवाइयां, जांच किट और चिकित्सा सामग्री बेतरतीब हालत में पड़ी मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। रविवार को स्थानीय लोगों की नजर जब सीएचसी जसरा की बाउंड्री के बाहर पड़े दवाओं और मेडिकल सामग्री के ढेर पर पड़ी तो लोग दंग रह गए। जिन दवाओं और जांच किटों को गरीब मरीजों तक पहुंचना चाहिए था, वे धूल और कचरे में सड़ती दिखाई दीं। देखते ही देखते मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने लगीं। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को सरकारी दवाइयां देने के बजाय बाहर मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, अस्पताल में जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों पर भेजे जाने का खेल लंबे समय से चल रहा है। लोगों का कहना है कि गरीब मरीजों के नाम पर आने वाली सरकारी सुविधाएं आखिर किसके इशारे पर कबाड़ में फेंकी जा रही हैं। सूत्रों की मानें तो शासन से मुफ्त इलाज और जांच के लिए भेजी गई दवाइयां व किट स्टोरों में पड़ी-पड़ी खराब हो जाती हैं और बाद में उन्हें चुपचाप फेंक दिया जाता है। आरोप यह भी लग रहे हैं कि निजी मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी सेंटरों को फायदा पहुंचाने के लिए कमीशनखोरी का संगठित खेल चल रहा है। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब अस्पताल में दवाइयां और जांच सामग्री मौजूद हैं तो फिर मरीजों को बाहर क्यों दौड़ाया जा रहा है। गरीब और असहाय मरीज इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण झेलने को मजबूर हैं, जबकि सरकारी संसाधनों की खुलेआम बर्बादी की जा रही है। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी डॉक्टरों, कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी अस्पतालों पर जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। अब सबकी निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह कागजों और फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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